ये पोस्ट पंगेबाज.काम पर यहा चली गई है
असुविधा के लिये खेद है
Categories: बात बेबात
masijeevi // July 8, 2007 at 4:06 am | Reply
नए ठिकाने पर स्वागत।
kakesh // July 8, 2007 at 4:53 am | Reply
स्वागत है श्रीमान.. हमरी पोस्ट पर भी दो ध्यान
पंगेबाज वापस !! …एक अन्दर की बात …!! « हम भी हैं लाइन में // July 8, 2007 at 4:59 am | Reply
[...] से पता चला है कि वो फिर आ रहे हैं …नहीं जी आ गये हैं…… [...]
संजय बेंगाणी // July 8, 2007 at 5:31 am | Reply
क्या बात है! छा गए गुरू.. वापसी ज्यादा रंग में दिख रही है. मुम्बई पर कहर का कारण आपने सही पकड़ा है. और गधे के सिंग वाली बात तो सुबान-अल्लाह…
अफ़लातून // July 8, 2007 at 7:35 am | Reply
लगे रहें मित्र । साधुवाद ।
Shrish // July 8, 2007 at 10:33 pm | Reply
बाकी तो सब ठीक है पर ये बार बार घर बदलना चिट्ठे की सेहत के लिए ठीक नहीं होगा। वो जो ब्लॉग था वो आपका अपना था, आप वहीं पर लिखें मौज से। एग्रीगेटर के बारे में भूल जाइए बस।
अनूप शुक्ल // July 9, 2007 at 2:39 am | Reply
बढ़िया है। पंगे लेने का काम भी पुण्य का है। लगे रहो।
पंगेबाज » “स्वागत है आपका यहा” // July 20, 2007 at 6:50 am | Reply
[...] // Jul 8th 2007 at 4:06 am [...]
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8 responses so far ↓
masijeevi // July 8, 2007 at 4:06 am |
नए ठिकाने पर स्वागत।
kakesh // July 8, 2007 at 4:53 am |
स्वागत है श्रीमान..
हमरी पोस्ट पर भी दो ध्यान
पंगेबाज वापस !! …एक अन्दर की बात …!! « हम भी हैं लाइन में // July 8, 2007 at 4:59 am |
[...] से पता चला है कि वो फिर आ रहे हैं …नहीं जी आ गये हैं…… [...]
संजय बेंगाणी // July 8, 2007 at 5:31 am |
क्या बात है! छा गए गुरू..
वापसी ज्यादा रंग में दिख रही है.
मुम्बई पर कहर का कारण आपने सही पकड़ा है.
और गधे के सिंग वाली बात तो सुबान-अल्लाह…
अफ़लातून // July 8, 2007 at 7:35 am |
लगे रहें मित्र । साधुवाद ।
Shrish // July 8, 2007 at 10:33 pm |
बाकी तो सब ठीक है पर ये बार बार घर बदलना चिट्ठे की सेहत के लिए ठीक नहीं होगा। वो जो ब्लॉग था वो आपका अपना था, आप वहीं पर लिखें मौज से। एग्रीगेटर के बारे में भूल जाइए बस।
अनूप शुक्ल // July 9, 2007 at 2:39 am |
बढ़िया है। पंगे लेने का काम भी पुण्य का है। लगे रहो।
पंगेबाज » “स्वागत है आपका यहा” // July 20, 2007 at 6:50 am |
[...] // Jul 8th 2007 at 4:06 am [...]